जिले में जमीन की जंग में जा रही जान, पीट-पीटकर हत्या की बर्बर घटनाओं में बढ़ोतरी
जनता दरबार और पुलिस व्यवस्था फेल, छोटे विवाद भी ले रहे जानलेवा रूप
Samastipur : जिले में जमीन विवाद अब जानलेवा बन चुका है। छोटी कहासुनी भी हिंसा और हत्या में बदल रही है। जनता दरबार के बावजूद समाधान नहीं हो रहा। पुलिस की सुस्ती से भूमि विवाद की घटनाओं में वृद्धि हुई। लोग अब कानून आपने हाथों में ले रहे हैं। इस कारण जिले में भूमि विवाद में पीट-पीटकर हत्या की घटनाएं बढ़ चुकी हैं। जबकि जिले के एसपी अरविंद प्रताप सिंह भूमि मामलों की समझ रखते हैं। इसके बावजूद उनके कार्यकाल में भी घटनाएं थम नहीं रही हैं, जिससे लोगों में डर और आक्रोश बढ़ता जा रहा है। बताते चलें कि बीते बुधवार को कर्पूरीग्राम थाना क्षेत्र में जमीनी विवाद में 83 वर्षीय एक वृद्ध की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। यह घटना एक मामूली से विवाद को लेकर हुई थी। दो पक्षों के बीच रास्ते को लेकर विवाद चल रहा था और जमीन मापी के दौरान दोनों पक्ष आमने-सामने हो गए थे। इस हिंसक मारपीट की घटना में बाघी वार्ड संख्या 6 के रामचंद्र सिंह (83 वर्ष) की मौत हो गई।
थानों पर आने वाली शिकायतों को शुरुआती स्तर पर गंभीरता से नहीं लेती पुलिस
हाल के कुछ महीनों में पीट-पीटकर हत्या की इन घटनाओं ने पूरे जिले को दहला दिया है। छोटे-छोटे विवाद देखते ही देखते खूनी संघर्ष में बदल रहे हैं और लोग इसमें अपनी जान गंवा रहे हैं। जिले में पहले भी जमीन को लेकर गोली मारकर हत्या और मारपीट की घटनाएं सामने आती रही हैं, लेकिन अब पीट-पीटकर हत्या के मामलों में लगातार बढ़ोतरी ने हालात को और भयावह बना दिया है। विडंबना यह है कि भूमि विवाद के समाधान के लिए अंचल कार्यालय से लेकर डीएम और एसपी कार्यालय तक नियमित रूप से जनता दरबार लगाए जा रहे हैं, लेकिन इनका असर जमीन पर कहीं नजर नहीं आ रहा है। लोग फरियाद लेकर पहुंचते हैं, लेकिन समाधान के अभाव में विवाद और गहराता चला जाता है। सबसे बड़ा सवाल पुलिस की भूमिका पर उठ रहा है। थानों पर आने वाली शिकायतों को अगर शुरुआती स्तर पर गंभीरता से लिया जाए, तो शायद कई जानें बच सकती हैं। लेकिन आरोप है कि पुलिस की सुस्ती और अनदेखी के कारण ही ये विवाद हिंसक रूप ले रहे हैं।
सरकारी निर्देश बेअसर: अंचल-पुलिस समन्वय की कमी बनी बड़ी वजह
भूमि विवादों के प्रभावी समाधान को लेकर मुख्य सचिव की बीते दिनों बिहार के डीजीपी के साथ बैठक हुई थी। इसमें अंचलों की संख्या कम और थानों की संख्या अधिक होने के कारण अंचल अधिकारी सभी थानों में नहीं पहुंच पाते थे और अक्सर अपने अधीनस्थ अमीन या राजस्व कर्मियों को भेज देते थे, जो निर्णय लेने में सक्षम नहीं होते। इस व्यवस्था को समाप्त करने के लिए अब प्रत्येक शनिवार को अंचल कार्यालय में अंचल अधिकारी की अध्यक्षता में बैठक करने का निर्देश दिया गया था। इसमें संबंधित अंचल के अंतर्गत आने वाले सभी थाना प्रभारी को अपने किसी प्रतिनिधि को भेजने पर रोक लगाते हुए स्वयं उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, इन निर्देशों का जिले में समुचित ढंग से पालन नहीं हो रहा है। बैठक में दिए गए स्पष्ट निर्देशों के अनुसार, भूमि विवाद के स्थल निरीक्षण के दौरान अंचल अधिकारी और थानाध्यक्ष संयुक्त रूप से जाएंगे। पुलिस केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने की भूमिका निभाएगी, जबकि भूमि संबंधी निर्णय लेने का अधिकार अंचल के पास ही रहेगा।
मात्र 10 इंच जमीन विवाद में बुजुर्ग की पीटकर हत्या
हलई थाना क्षेत्र के जोरपुरा में मात्र 10 इंच के जमीन विवाद में बीते 21 मार्च को पीट-पीटकर 72 वर्षीय बुजुर्ग सुरेंद्र सहनी की हत्या कर दी गई थी। इस घटना से मात्र 10 दिन पूर्व आरोपियों ने पीड़ित परिवार के साथ मारपीट की थी और हत्या की धमकी दी थी। इसको लेकर मामला भी दर्ज कराया गया था। बावजूद इसके पुलिस की शिथिल कार्रवाई के कारण बुजुर्ग की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई।
जमीन विवाद में हिंसक झड़प में मारपीट, महिला की मौत
दलसिंहसराय थाना क्षेत्र के चकनवादा वार्ड 10 में बीते चार फरवरी की शाम जमीन विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच हुई हिंसक झड़प में मो. इलताफ उर्फ बेचने की पत्नी तरुन्नुम बेगम (40 वर्ष) की मौत हो गई थी। वहीं, मारपीट में चार अन्य महिलाएं गंभीर रूप से घायल हो गईं थीं। घायलों को अनुमंडलीय अस्पताल दलसिंहसराय में भर्ती कराया गया था।
झोपड़ी निर्माण को लेकर विवाद में एक की पीट-पीटकर हत्या
बिथान थाना क्षेत्र के मोरकाही गांव में बीते आठ अप्रैल की सुबह दो पक्षों के बीच हुए जमीन विवाद को लेकर हुई मारपीट में मो. रज्जाक (50 वर्ष) की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। वहीं, इस घटना में एक महिला समेत छह से अधिक लोग घायल हो गए थे। घटना दो गोतिया पक्षों के बीच झोपड़ी निर्माण को लेकर शुरू हुआ था और इसने हिंसक रूप अख्तियार कर लिया था।

