समस्‍तीपुर

मानसिक व अज्ञात मरीजों के इलाज के लिए सदर अस्पताल में बना विशेष वार्ड

महिला पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड के पास छह बेड की व्यवस्था, विशेष निगरानी में होगी देखभाल

Samastipur : अज्ञात और मानसिक रूप से अस्वस्थ मरीजों के बेहतर इलाज को लेकर सदर अस्पताल में विशेष तैयारी शुरू कर दी गई है। ऐसे मरीजों के लिए अस्पताल में अलग से छह बेड का अतिरिक्त वार्ड बनाया गया है, जो महिला पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड के पास स्थित है, ताकि उन्हें सुरक्षित वातावरण में समुचित इलाज मिल सके। इस वार्ड की निगरानी और संचालन के लिए एक चिकित्सक को नोडल अधिकारी बनाया जाएगा, जो पूरी व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालेंगे। जानकारी के अनुसार, पहले इन मरीजों के लिए अलग से कोई समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। कई बार अज्ञात या मानसिक रूप से बीमार मरीजों की देखभाल में विशेष सतर्कता की जरूरत होती है, जो सामान्य वार्ड में संभव नहीं हो पाती थी। इसी को देखते हुए अब इस विशेष वार्ड की व्यवस्था की गई है, जहां मरीजों को बेहतर इलाज के साथ लगातार निगरानी भी मिल सकेगी। शुक्रवार को यहां मानसिक रूप से विक्षिप्त दो लावारिस मरीजों को भर्ती कर इलाज शुरू भी कर दिया गया है।

विशेष निगरानी में रहेंगे मरीज, हर समय तैनात रहेगा स्टाफ

बताया गया कि कई बार ऐसे मरीज, जिनका कोई परिजन नहीं होता, वे असावधानीवश बेड से गिर जाते हैं या खुद को नुकसान पहुंचा बैठते हैं। इस स्थिति को देखते हुए अब उन्हें स्पेशल वार्ड में भर्ती कर विशेष निगरानी में रखा जाएगा। इस वार्ड में भर्ती मरीजों को अस्पताल की सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही नर्सिंग स्टाफ और वार्ड ब्वाय की ड्यूटी इस तरह लगाई जाएगी कि मरीजों की हर समय देखरेख हो सके और किसी भी तरह की दुर्घटना से बचाव किया जा सके। अस्पताल प्रशासन का मानना है कि इस नई व्यवस्था से मरीजों की सुरक्षा के साथ-साथ इलाज की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा। पहले जहां ऐसे मरीजों की देखभाल चुनौतीपूर्ण थी, वहीं अब समर्पित वार्ड के कारण चिकित्साकर्मियों को भी सुविधा मिलेगी और मरीजों को अधिक सुरक्षित माहौल उपलब्ध हो सकेगा।

डिप्रेशन के बढ़ते मामले, गांव-गांव में पहचान की तैयारी

राज्य सरकार के निर्देश पर मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में मानसिक रूप से विक्षिप्त मरीजों के लिए विशेष वार्ड तैयार किए जा रहे हैं। इसी क्रम में यहां भी छह बेड का वार्ड पूरी तरह तैयार कर लिया गया है और मरीजों का इलाज शुरू हो चुका है। जरूरत पड़ने पर गंभीर मरीजों को मेडिकल कॉलेज और अन्य उच्च स्तरीय स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर किया जाएगा, ताकि उनका बेहतर इलाज संभव हो सके। साथ ही स्वास्थ्य विभाग आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देगा, जिससे वे गांव-गांव में ऐसे मरीजों की पहचान कर उन्हें अस्पताल तक ला सकें। सदर अस्पताल के डीएस डॉ. गिरीश कुमार ने बताया कि आर्थिक तंगी, पारिवारिक जिम्मेदारियां, आगे बढ़ने की होड़ और नशा डिप्रेशन के प्रमुख कारण बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले के मुकाबले अब मानसिक समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, खासकर युवाओं में प्रतिस्पर्धा के कारण मानसिक दबाव अधिक देखने को मिल रहा है।

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