बिहार

सरकारी अस्पतालों में निजी नर्सिंग होम की दलाली पर सख्ती, निरीक्षण दल गठित करने का आदेश

सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों को निजी नर्सिंग होम, निजी जांच घर और दवा दुकानों की ओर गुमराह करने की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। सरकार के सचिव लोकेश कुमार सिंह ने इस संबंध में राज्य के सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किया है। निर्देश में कहा गया है कि सरकारी चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल, सदर अस्पताल, अनुमंडलीय अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं स्वास्थ्य उपकेंद्रों के परिसरों में निजी नर्सिंग होम, जांच घर या दवा प्रतिष्ठानों से जुड़े कर्मियों द्वारा मरीजों को बहकाने की सूचनाएं मिल रही हैं। ऐसे कृत्य को आमजन को सरकारी चिकित्सा सुविधा से वंचित करने और सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं में बाधा डालने के रूप में देखा गया है।

स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों में जिला स्तर पर निरीक्षण दल का गठन कर निरंतर जांच कराने का निर्देश दिया है। निरीक्षण दल में वरीय उप समाहर्ता, जिला स्तर के अन्य पदाधिकारी तथा संबंधित सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में पदस्थापित चिकित्सा पदाधिकारी को शामिल किया जाएगा। जांच के दौरान दोषी पाए जाने वाले निजी व्यक्तियों के साथ-साथ इसमें संलिप्त सरकारी कर्मियों के विरुद्ध भी कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई की जाएगी। निरीक्षण कार्य के नियमित अनुश्रवण के लिए प्रत्येक जिले में एक नोडल पदाधिकारी नामित करने का भी निर्देश दिया गया है। नोडल पदाधिकारी जिला स्तर पर निरीक्षण प्रतिवेदनों की समीक्षा करेंगे और स्वास्थ्य विभाग को रिपोर्ट भेजेंगे। सभी जिलाधिकारियों से एक्शन टेकन रिपोर्ट भी विभाग को उपलब्ध कराने को कहा गया है। राज्य स्तर पर नोडल पदाधिकारी के रूप में धनंजय कुमार, अपर सचिव, स्वास्थ्य विभाग, बिहार, पटना को नामित किया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि सरकारी अस्पतालों में पारदर्शी और नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है और इसमें किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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