नियम-कानून की जानकारी नहीं और बन गए थानेदार, बिना साक्ष्य शराब केस, आरोपी की जगह परिजन गिरफ्तार
खानपुर : शराब पीने के वायरल वीडियो मामले में शराब बरामदगी का केस, न शराब बरामद न मेडिकल जांच
उजियारपुर : आरोपी की जगह वृद्ध परिजन को पुलिस ने गिरफ्तार कर भेजा न्यायिक हिरासत में
Samastipur : समस्तीपुर पुलिस का आए दिन नए-नए कारनामें सामने आते रहते हैं। जीवित महिला को मृत घोषित करने का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ है कि पुलिस के दो और कारनामें सामने आए हैं। पहला मामला खानपुर थाना का है। जहां शराब पीने के एक वायरल वीडियो के मामले में पुलिस ने शराब बरामगी की धारा लगाते हुए आरोपियों को शराब कारोबारी बना दिया। बिना बरामदगी, मेडिकल या ब्रेथ टेस्ट के धारा 30(ए) लगाई गई। शराब पीने के मामले में ब्रेथ टेस्ट और मेडिकल जांच में पुष्टि होने के बाद बिहार मद्य निषेध अधिनियम की धारा 37 लगाई जाती है। वहीं, शराब बरामदगी वाले मामले में बिहार मद्य निषेध अधिनियम की धारा 30(ए) लगती है। लेकिन यहां न तो ब्रेथ टेस्ट हुआ और ना ही शराब बरामद हुई। जबकि हाई कोर्ट अपने एक फैसले में स्पष्ट निर्णय दे चुकी है कि शराब सेवन की पुष्टि के लिए मेडिकल या अन्य वैज्ञानिक जांच अनिवार्य है। केवल वीडियो या अनुमान के आधार पर शराब सेवन (कंजम्पशन) सिद्ध नहीं किया जा सकता। वहीं, दूसरा मामला उजियारपुर थाना का है। जहां पुलिस ने आरोपी की जगह उसके वृद्ध परिजन को ही गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
वायरल वीडियो पर एफआईआर, न शराब बरामद न जांच, खानपुर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल
जिले के खानपुर थाना में शराब पीने के वायरल वीडियो के आधार पर दर्ज प्राथमिकी अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। पुलिस ने बिना किसी ठोस साक्ष्य के बिहार मद्य निषेध अधिनियम की धारा 30(ए) के तहत मामला दर्ज कर दिया, जबकि न तो मौके से शराब की बरामदगी हुई और न ही आरोपितों का कोई मेडिकल या ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट कराया गया। खानपुर थाना अध्यक्ष के स्व-बयान के आधार पर दर्ज एफआईआर में कहा गया है कि सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में दो व्यक्तियों को कथित रूप से विदेशी शराब पीते हुए दिखाया गया है। जांच के दौरान गांव के चौकीदार के माध्यम से दोनों की पहचान कर सीधे नामजद प्राथमिकी दर्ज कर दी गई। ऐसे मामलों में सामान्यतः शराब सेवन से संबंधित धारा 37 लागू होती है, वह भी तब जब वैज्ञानिक परीक्षण से पुष्टि हो, इसके बावजूद पुलिस द्वारा धारा 30(ए) लगाने पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब मौके से कोई भौतिक साक्ष्य बरामद नहीं हुआ, तो केवल वीडियो के आधार पर इतनी गंभीर कानूनी कार्रवाई कैसे कर दी गई।
कोर्ट के फैसलों के बावजूद पुलिस कार्रवाई पर उठ रहे कानूनी सवाल
खानपुर थाना में वायरल वीडियो के आधार पर दर्ज शराब सेवन का मामला अब कानूनी कसौटी पर कमजोर नजर आ रहा है। विधि विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में धारा 37 तभी लागू होती है जब सेवन की पुष्टि वैज्ञानिक साक्ष्यों, जैसे ब्रेथ एनालाइजर या मेडिकल जांच से हो। इस मामले में न तो कोई जांच कराई गई और न ही वीडियो की फोरेंसिक पड़ताल हुई, जिससे यह साबित नहीं हो पा रहा कि दिख रहा पदार्थ वास्तव में शराब है। केवल चौकीदार की पहचान के आधार पर की गई कार्रवाई भी अदालत में चुनौती झेल सकती है। सुप्रीम कोर्ट व उच्च न्यायालयों ने भी स्पष्ट किया है कि मात्र अनुमान या दृश्य के आधार पर दोष सिद्ध नहीं किया जा सकता। ‘बचन सिंह बनाम राज्य पंजाब’ और ‘शरद बिरधीचंद शारदा बनाम महाराष्ट्र’ जैसे मामलों में ठोस साक्ष्य को अनिवार्य बताया गया है। वहीं, पटना हाईकोर्ट ने ‘अनिल कुमार सिंह बनाम राज्य बिहार’ में वैज्ञानिक जांच को जरूरी माना है। ऐसे में कमजोर साक्ष्यों के आधार पर केस आगे बढ़ने पर आरोपितों को संदेह का लाभ मिल सकता है।
आरोपी की जगह वृद्ध परिजन को पुलिस ने गिरफ्तार कर भेज दिया न्यायिक हिरासत में
उजियारपुर थाना क्षेत्र के वैकुंठपुर ब्रह्मंड वार्ड-13 में जमीन विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच हुई मारपीट के मामले में पुलिस की कार्रवाई सवालों के घेरे में आ गई है। दोनों पक्षों के आवेदन पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी, लेकिन नामजद आरोपियों की जगह एक वृद्ध परिजन को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। मामले में 65 वर्षीय शंकर महतो ने आवेदन देकर बताया कि उसका अपने भाई दोरिक महतो से लंबे समय से जमीन विवाद चल रहा है, जिसका समाधान कई पंचायतों के बावजूद नहीं हो सका। आरोप है कि 4 मई की सुबह भाई की बहू लक्ष्मी देवी और पोता गोलू कुमार ने गाली-गलौज करते हुए उस पर ईंट व खंती से हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। प्राथमिकी में दोनों को नामजद किया गया, लेकिन पुलिस ने उन्हें छोड़कर दोरिक महतो को ही गिरफ्तार कर लिया, जिससे कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं।
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दोनों ही मामलों को देखा जा रहा है। वरीय पदाधिकारी के से दोनों मामलों की जांच कराई जाएगी। इसमें जो भी दोषी पाए जाएंगे उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
अरविंद प्रताप सिंह, एसपी, समस्तीपुर

