ग्रुप सुपरविजन के अभाव और वाहन चोरी कोषांग का गठन नहीं होने से चोरी की घटनाएं बढ़ीं
मुख्यालय के निर्देशों की जिले में अनदेखी: अब छोटी चोरी और स्नैचिंग भी ‘छोटे संगठित अपराध’ की श्रेणी में, होगी सख्त निगरानी
समस्तीपुर शहर सहित जिले भर में ठंड के आगमन के पूर्व से ही चोरी की घटनाओं में वृद्धि दर्ज की जा रही है। देर रात घर, दुकान, विद्यालय और थाने पर चोरी की घटना हो रही है। इस वर्ष अकेले शहर में चोरी की 117 से अधिक घटनाएं नगर व मुफ्फसिल थाने में दर्ज की गई है। इसमें बाइक चोरी की घटनाएं भी शामिल हैं। इसके अलावा शहर में राहगीरों से रुपए, सोने का चेन व मोबाइल छीनने की घटनाएं पुलिस के लिए चिंता का विषय बन गई हैं। जैसे-जैसे रातें ठंडी और लंबी हो रही हैं, चोर व बदमाशों की सक्रियता भी बढ़ने लगी है। ऐसा नहीं है कि चोरी की यह घटनाएं अचानक बढ़ गई हैं। बाइक चोरी की घटनाओं पर लगाम लगाने को लेकर पिछले वर्ष डीजीपी विनय कुमार ने समस्तीपुर सहित सभी जिलों में बाइक चोरी कोषांग का गठन करने का निर्देश दिया था। इसमें थाना स्तर पर चोरी की घटनाओं की तकनीकी जांच, गिरोहों की पहचान, सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण और चोरी की संपत्ति की बरामदगी पर विशेष रूप से काम किया जाना था। वहीं, इन घटनाओं में ग्रुप सुपरविजन करने का निर्देश था। हालांकि, जिले में अभी ऐसी कोई कोषांग गठित नहीं है और इन मामलों में ग्रुप सुपरविजन भी नहीं हो रहा है। इसका सीधा असर चोरी की घटनाओं में वृद्धि के रूप में देखने को मिली थी। इन बड़े से बड़े मामले में कुछ को छोड़ दें तो अधिकांश में पुलिस के हाथ खाली हैं। कुल मिलाकर स्थिति यह है कि सामान्य प्राथमिकी, वारंटी एवं नशेड़ियों की धरपकड़ से लेकर सड़कों पर वाहन चेकिंग करने में व्यस्त पुलिस इस तरह की घटना का खुलासा करने में असमर्थ है। चोरी की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए अब बिहार पुलिस मुख्यालय छोटी चोरी की घटनाओं को संगठित अपराध की श्रेणी में रखने जा रही है।
जिले में मुख्यालय के निर्देश के बावजूद नहीं बनी वाहन चोरी कोषांग, शुरू नहीं हुआ ग्रुप सुपरविजन
जिले में ना तो वाहन चोरी कोषांग का गठन हुआ और ना ही चोरी मामलों में ग्रुप सुपरविजन की शुरुआत हुई। बता दें कि वाहन चोरी कोषांग के लिए मुख्यालय से जारी एसओपी में रात में गश्त बढ़ाने, मार्केट और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में मोबाइल टीमों की तैनाती, संदिग्ध व्यक्तियों की निगरानी और अपराध प्रभावित इलाकों में लगातार पेट्रोलिंग का निर्देश दिया गया था। इसके अलावा चेन स्नैचिंग पर भी सख्ती करते हुए महत्वपूर्ण चौक-चौराहों पर अतिरिक्त बल लगाने का निर्देश था। वहीं, गृहभेदन और वाहन चोरी की घटनाओं पर नियंत्रण और उन घटनाओं को अंजाम देने वाले अभियुक्तों तक पहुंचने के लिए पुलिस ग्रुप सुपरविजन करने का निर्देश था। यह निर्देश इस वर्ष अप्रैल महीने में जारी किया गया था। इसको लेकर पुलिस मुख्यालय ने समस्तीपुर सहित सभी जिलों को निर्देश दिया था। इस तरह की चोरी की घटनाओं के ग्रुप सुपरविजन के लिए अलग से इंस्पेक्टर रैंक के पदाधिकारी के नेतृत्व में टीम का भी गठन करने की बात थी। ऐसी घटनाओं में होने वाली बढ़ोतरी को देखते हुए मुख्यालय ने यह पहल की थी। जिलों के एसएसपी और एसपी को इन कांडों का ग्रुप सुपरविजन कराना सुनिश्चित करने को कहा गया था।
एक साथ जांच का था प्लान, ग्रुप सुपरविजन से कई कांडों के उद्भेदन की थी संभावना
वाहन चोरी और गृहभेदन की घटनाओं का ग्रुप सुपरविजन में ऐसी कई घटनाओं का एक साथ अनुसंधान और जांच होना था। एक साथ कई कांडों को क्लब कर जांच करने से यह पता चल सकता कि उन घटनाओं को अंजाम देने वाला गिरोह एक ही है या अलग-अलग। जांच में अगर एक ही गिरोह के सदस्यों द्वारा घटनाओं का अंजाम देने की बात सामने आती है तो उनतक पहुंचना आसान होगा और एक साथ कई कांडों का उद्भेदन एक साथ किया जा सकता साथ ही अभियुक्तों की गिरफ्तारी भी आसान हो जाती। जब कांडों की जांच अलग-अलग होती है तो अभियुक्तों के बयान पर कांडों का मिलान करना पड़ता है, पुलिस को अन्य थानों से संपर्क करना पड़ता है जिसमें काफी समय लगता है। ग्रुप सुपरविजन और अभियुक्तों की पहचान के लिए। इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर की मदद ली जाएगी।
डीजीपी का नया मॉडल: छोटी चोरी भी मानी जाएगी संगठित अपराध, सभी मामले होंगे एसआर केस
बिहार के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विनय कुमार ने नई सरकार के गठन के बाद पुलिसिंग का तरीका बदल दिया है। अब छोटी-मोटी चोरियों, जेब काटने और धोखाधड़ी जैसे अपराधों को भी संगठित अपराध की श्रेणी में रखा जाएगा। इन पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी और अपराधियों को बड़े गिरोह का हिस्सा माना जाएगा। डीजीपी ने ‘छोटा संगठित अपराध’ नाम से एक नई श्रेणी बनाई है। इसके तहत चोरी, स्नैचिंग, फ्रॉड-चीटिंग, अवैध टिकट बिक्री, जुआ-सट्टा और पेपर सेल जैसे अपराध अब स्पेशल रिपोर्टेड (एसआर) केस माने जाएंगे। इसका मतलब है कि इन सभी मामलों में अनिवार्य रूप से विशेष निगरानी, रिपोर्टिंग और ट्रैकिंग की जाएगी।

