मन्नीपुर माई स्थान : आस्था का वह केंद्र जहां पूरी होती हैं मनोकामनाएं, कोई नहीं लौटता खाली हाथ
समस्तीपुर जिले का मन्नीपुर गांव श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। वारिसनगर प्रखंड के शेखोपुर पंचायत में स्थित यह मन्नीपुर माई स्थान जिला मुख्यालय से करीब पांच किलोमीटर की दूरी पर है। मान्यता है कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं की हर मनोकामना पूरी होती है और कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता। आम दिनों में सैकड़ों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं, जबकि नवरात्र के दौरान सप्तमी, अष्टमी और नवमी तिथियों को भारी भीड़ उमड़ती है। खासकर महिलाएं मांग में सिंदूर भरवाने और नारियल अर्पित करने के लिए यहां पहुंचती हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और स्थापना
करीब डेढ़ सौ वर्ष पूर्व, जब इस इलाके में हैजा और स्पैनिश फ्लू जैसी महामारियों ने तबाही मचाई थी, तब गांववाले चारों ओर मौत का मंजर देखकर भयभीत थे। कहा जाता है कि उसी दौरान एक वृद्धा गांव में आईं और लोगों से माता की पिंडी स्थापित कर पूजा करने की सलाह दी। थोड़ी ही देर में वह वृद्धा रहस्यमय तरीके से लापता हो गईं। इसके बाद गांव के उत्तर-पूर्व कोने में एक साधारण झोपड़ी के भीतर पिंडी स्थापित कर पूजा शुरू हुई।
शुरुआत में पूजन-अर्चन की जिम्मेदारी राम खेलावन दास ने संभाली। बाद में दौलतपुर निवासी स्वर्गीय वासुदेव नारायण ने भूमि क्रय कर पहला मंदिर बनवाया और मूर्ति की स्थापना की। वर्ष 2016 में मन्नीपुर निवासी प्रह्लाद सिंह की भूमि पर वर्तमान भव्य दो मंजिला मंदिर का निर्माण हुआ। मंदिर परिसर में 51 फीट ऊंची पंचमुखी हनुमान प्रतिमा और नवग्रह की स्थापना भी की गई है।
आस्था का केंद्र
मन्नीपुर माई स्थान को ‘मनोकामना सिद्धपीठ’ कहा जाता है। यहां माथा टेकने वालों के दुख-दर्द दूर होते हैं और जीवन में शांति का संचार होता है। स्थानीय मुख्य पुजारी विपिन कुमार झा नियमित पूजा-अर्चना का संचालन करते हैं।
नवरात्र की विशेष तैयारी
मंदिर न्यास समिति के सचिव रवि प्रकाश ने बताया कि इस बार शारदीय नवरात्र के अवसर पर भक्तों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विशेष पंडाल का निर्माण कराया जा रहा है। 25 सितंबर से 1 अक्टूबर तक मंदिर परिसर में श्रीराम कथा का आयोजन होगा, जिसकी कथा वाचिका श्रृचा मिश्रा होंगी। समिति ने यह भी आश्वासन दिया है कि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होने दी जाएगी।

