समस्‍तीपुर

बच्चा चोरी अफवाहों से दहशत, सामुदायिक पुलिसिंग की कमी से बढ़ता भीड़तंत्र और पुलिस पर अविश्वास

पंचायत बैठकों के अभाव और कमजोर सूचना तंत्र से बच्चा चोरी की अफवाहों ने फैलाया व्यापक भय

Samastipur : जिले में सामुदायिक पुलिसिंग का अभाव है और यही कारण है कि लोगों का पुलिस पर से भरोसा उठता जा रहा है। लोग अब छोटी से छोटी बात और अफवाहों में आकर उग्र हो जा रहे हैं। भीड़ तंत्र बिना कुछ सही-गलत जाने खुद न्याय करने को आतुर हो रही है। पुलिस को इसकी सूचना स्थानीय जनप्रतिनिधि अथवा सोशल मीडिया के माध्यम से मिलती है। इसका सबसे बड़ा कारण पुलिस और क्षेत्र के लोगों के बीच आपसी संवाद के कमी है। साथ ही पुलिस का सूचना तंत्र भी कमजोर है। क्षेत्र की गतिविधियों की सूचना देने का जिम्मा जिन चौकीदारों पर है, उनसे पुलिस थानों में काम लिया जाता है। वहीं, गांवों ग्राम रक्षा दल का गठन नहीं है और पुलिस की गांवों बैठकें तक नहीं होती है। बता दें कि जिले में इन दिनों बच्चा चोरी की अफवाहों ने लोगों में दहशत का माहौल बना दिया है। हालांकि, अब तक जिले के किसी भी थाने में बच्चा चोरी का एक भी मामला दर्ज होने की खबर नहीं है। इसके बावजूद अफवाहों के आधार पर भीड़ द्वारा निर्दोष लोगों की पिटाई की कई घटनाएं सामने आई हैं। बीते दिनों मुफ्फसिल थाना क्षेत्र में अलग-अलग मामलों में भीड़ के द्वारा एक महिला और एक पुरुष को पकड़ कर पिटाई किए जाने की घटना सामने आई है। बच्चा चोर की अफवाहों के कारण ग्रामीणों में भय का माहौल है। अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने से भी कतरा रहे हैं और उन्हें बाहर खेलने भी नहीं भेज रहे हैं। वहीं, सोशल मीडिया पर अपुष्ट संदेश तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिससे स्थिति और बिगड़ रही है।

थानाध्यक्ष नहीं कर रहे पंचायत स्तर पर जनसंवाद, गांवों में ग्राम रक्षा दल नहीं, चौकीदारों से थानों पर लिया जा रहा काम

बिहार में अपराध नियंत्रण और पुलिस-जनता के बीच विश्वास मजबूत करने के उद्देश्य से थानाध्यक्षों को पंचायत और गांवों में नियमित बैठक करने का निर्देश दिया गया है। इस पहल के तहत प्रत्येक थाना क्षेत्र में पंचायत स्तर पर पूर्व सूचना के साथ बैठक आयोजित की जानी है, जिसमें स्थानीय जनप्रतिनिधि, ग्राम रक्षा दल के सदस्य, चौकीदार एवं ग्रामीणों को शामिल होना है। हालांकि, थानाध्यक्ष गांवों में बैठक आयोजित नहीं कर रहे हैं। ग्राम रक्षा दल भी गांवों में दिखाई नहीं देती है। चौकीदारों से पुलिस थानों पर काम लिया जाता है। इस कारण संदिग्ध गतिविधियों व घटनाओं की सूचना पुलिस को समय पर प्राप्त नहीं हो पाती है। ग्राम स्तर पर बैठकों का मुख्य उद्देश्य गांवों में उत्पन्न विवादों का स्थानीय स्तर पर समाधान, अपराध की रोकथाम और कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करना है। पुलिस पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि बैठक के दौरान प्राप्त शिकायतों और सुझावों का संधारण कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें। इस व्यवस्था में ग्राम रक्षा दल की सक्रिय भूमिका तय की गई है, जो रात्रि गश्ती और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना देने में सहयोग करेगा। वहीं, चौकीदार गांव स्तर पर पुलिस के संपर्क सूत्र के रूप में सूचना तंत्र को मजबूत करेंगे। पुलिस विभाग का मानना है कि इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होगी, आपसी विवादों का त्वरित समाधान संभव होगा और पुलिस कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी बनेगी।

फेरीवाले को बच्चा चोर समझ कर पीटा, पुलिस ने कराया मुक्त

जिले के कल्याणपुर थाना क्षेत्र की खरसंड पश्चिमी पंचायत स्थित सुरही टोला गांव में बीते 22 फरवरी की शाम एक कपड़ा फेरीवाले को बच्चा चोर समझ कर कुछ ग्रामीणों द्वारा जमकर पिटाई कर दी गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विवाह उत्सव के दौरान गांव में सड़क से गुजर रहे बाहरी व्यक्ति को देख कुछ लोगों को संदेह हुआ और अफवाह फैल गई कि वह बच्चा चोर है। इसके बाद कुछ ग्रामीणों ने बिना पुष्टि किए उसकी पिटाई कर दी। सूचना मिलते ही डायल 112 की टीम पहुंची फेरीवाले को भीड़ से मुक्त कराया।

मुखिया ने बचाई महिला की जान, मॉब लिंचिंग के लिए उतारू थी आक्रोशित भीड़

शाहपुर पटोरी थाना क्षेत्र के दक्षिणी धमौन गांव में बीते 21 फरवरी को उग्र ग्रामीणों की भीड़ ने बच्चा चोरी के आरोप में मानसिक रूप से विक्षिप्त एक महिला को बंधक बनाकर उसके साथ हिंसक बर्ताव किया गया। सूचना पर पहुंचे स्थानीय मुखिया ने उस महिला को भीड़ से बचा कर अपने घर पर सुरक्षार्थ रखा। इसके बाद ग्रामीणों की भीड़ ने मुखिया के घर को भी घेर लिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने लोगों को समझा बुझा कर शांत कराया और महिला का उपचार कराया। पुलिस की जांच में बच्चा चोरी की बात पूरी तरह से अफवाह निकली।

शरारती तत्वों ने बच्चा चोर की अफवाह उड़ाकर बुजुर्ग को घेरा, स्थानीय लोगों की हस्तक्षेप से बची जान

मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के मोहनपुर लगुनिया में बीते 21 फरवरी की सुबह लोगों ने बच्चा चोरी के आरोप में एक वृद्ध को पकड़ लिया। वृद्ध के साथ थोड़ी बहुत मारपीट भी की गई। हालांकि, स्थानीय लोगों के सूझबूझ से वृद्ध की जान बची। वृद्ध की पहचान नहीं हो सकी थी। मिली जानकारी के अनुसार, किसी शरारती शख्स ने बच्चा चोर का अफवाह उड़ा दिया था। इसके बाद उधर से पैदल गुजर रहे एक बुजुर्ग को लोगों ने घेर लिया था। जिसे पकड़ कर लोग सख्ती के साथ पूछताछ करने लगे। हालांकि, भमरुपुर के स्थानीय लोगों के हस्तक्षेप के बाद बुजुर्ग की जान बची।

पंचायत जनप्रतिनिधियों की सूझबूझ से मॉब लिंचिंग की एक बड़ी घटना होने से बच गई

मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के केवस निजामत पंचायत में बीते 22 फरवरी को ग्रामीणों ने बच्चा चोरी के संदेह में एक महिला को पकड़ लिया और उसके साथ मारपीट की। स्थानीय जनप्रतिनिधि मुखिया व सरपंच के द्वारा आक्रोशित भीड़ को किसी तरह समझा बुझाकर महिला को बचाया। उसके बाद पहुंची पुलिस को सुरक्षार्थ सुपुर्द कर दिया। महिला मानसिक रूप से विक्षिप्त बताई गई है। घटना देर शाम की बताई गई है। पंचायत जनप्रतिनिधियों की सूझबूझ से मॉब लिंचिंग की एक बड़ी घटना होने से रोक दी गई। महिला विभूतिपुर थाना क्षेत्र की बताई गई है।

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