क्राइम

EOU ने समस्तीपुर, पूर्णिया और वाराणसी में साइबर ठगी गिरोह का किया भंडाफोड़, 3 गिरफ्तार, सरगना फरार

मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा, सीबीआई को किया जा सकता है रेफर 

फर्जी एक्सचेंज बनाकर की जा रही थी साइबर ठगी, चीन, नेपाल, म्यांमार से भी जुड़े तार

बिहार की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की साइबर विंग ने दूरसंचार विभाग के सहयोग से एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी नेटवर्क का खुलासा किया है। समस्तीपुर, पूर्णिया और वाराणसी में की गई संयुक्त छापेमारी में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि गिरोह का मास्टरमाइंड अंजनी कुमार स्वतंत्र फरार हो गया। गिरफ्तार आरोपियों में समस्तीपुर जिले के रोसड़ा थाना क्षेत्र ढटट्टा गांव निवासी चंद्रबली सिंह, हसनपुर थाना क्षेत्र के दुधपुरा गांव निवासी पीओएस संचालक मुन्ना कुमार और पूर्णिया जिले के बायसी निवासी मोबाइल दुकानदार काशिफ महफूज शामिल हैं। पुलिस ने छापेमारी में वाराणसी से एक सिम बॉक्स, 16 एंटीना, राउटर और 13 बीएसएनएल सिम तथा पूर्णिया से एक सिम बॉक्स, राउटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए हैं।

 

डिजिटल अरेस्ट, निवेश धोखाधड़ी व अन्य साइबर अपराधों के लिए की जा रही थी हर महीने करीब 1.2 लाख कॉल

ईओयू की प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि यह गिरोह सिम बॉक्स तकनीक का इस्तेमाल कर अंतरराष्ट्रीय वीओआईपी कॉल को लोकल कॉल में बदलता था। इस प्रक्रिया के जरिए हर दिन चार हजार से अधिक फर्जी कॉल और हर महीने करीब 1.2 लाख कॉल की जाती थीं। इन कॉल्स का उपयोग डिजिटल अरेस्ट, निवेश धोखाधड़ी और अन्य साइबर अपराधों में किया जा रहा था। गिरोह की करतूत से दूरसंचार कंपनियों को करोड़ों रुपये का राजस्व नुकसान उठाना पड़ा। जानकारी मिली है कि गिरोह ने हजारों रुपये में फर्जी सिम कार्ड खरीदकर नेटवर्क तैयार किया और इसे बिहार, उत्तर प्रदेश, बंगाल से लेकर बेंगलुरु तक सक्रिय रखा।

मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा, सीबीआई को किया जा सकता है रेफर 

ईओयू अधिकारियों के अनुसार, इस नेटवर्क के तार नेपाल, चीन, म्यांमार, कंबोडिया और अन्य दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों से भी जुड़े हैं। समस्तीपुर के विभिन्न पीओएस से फर्जी पहचान पत्रों के आधार पर सिम कार्ड की आपूर्ति की जा रही थी, जिसमें रोसड़ा का बीएसएनएल सिम वितरक सज्जाद और मुन्ना कुमार जैसे स्थानीय लोग शामिल थे। इससे पहले भी ईओयू ने सुपौल और भोजपुर में इसी तरह के फर्जी एक्सचेंज का भंडाफोड़ किया था, जिनमें से भोजपुर वाला मामला सीबीआई को सौंपा जा चुका है। अधिकारियों ने बताया कि मौजूदा केस भी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है और इसे सीबीआई को रेफर करने की प्रक्रिया चल रही है। फिलहाल ईओयू की एसआईटी आरोपियों से पूछताछ कर नेटवर्क से जुड़े और लोगों की पहचान कर रही है तथा फरार सरगना अंजनी कुमार स्वतंत्र की गिरफ्तारी के लिए कई राज्यों में छापेमारी की जा रही है।

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