मुख्यालय के निर्देशों की अवहेलना: पुलिस पर हमलों में अज्ञात पर हो रही एफआईआर, 15 दिन में चार्जशीट नहीं
जिले में सामुदायिक पुलिसिंग कमजोर, नतीजा 40 से अधिक घटनाओं में 60 के करीब पुलिस कर्मी घायल
Samastipur : जिले में पुलिस टीम पर हमलों में कमी नहीं हो रही है। सामुदायिक पुलिसिंग जिले में कमजोर हो रही है और अपराधी के साथ-साथ आम लोग भी कानून अपने हाथ में ले रहे हैं। वहीं, नियम के विरुद्ध कार्रवाई में जिले की पुलिस भी पीछे नहीं है। ऐसे मामलों में पुलिस की कार्रवाई मुख्यालय के निर्देश के विपरीत हो रही है। बताते चलें कि हलई थाना क्षेत्र के पटोरी प्रखंड अंतर्गत दरबा पंचायत में बीते अक्टूबर महीने में एक आरोपी को गिरफ्तार करने गई हलई पुलिस टीम पर लोगों ने जानलेवा हमला कर दिया। इसमें एसआई नितुन कुमार व सुजीत कुमार समेत कई पुलिस बल घायल हो गए थे। उपद्रवियों ने गिरफ्तार आरोपी को भी जबरन पुलिस गिरफ्त से छुड़ा लिया था। साथ ही पुलिस बलों से हथियार छीनने का भी प्रयास किया था। इस घटना को लेकर हलई थाने में 10 ज्ञात व अन्य अज्ञात लोगों पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। घटना के 15 दिन से अधिक बीतने के बावजूद चार्जशीट पेश नहीं किया गया है। इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। जिले में ऐसे कई मामले हैं जिनमें अज्ञात के विरुद्ध एफआईआर दर्ज किया गया है और 15 दिन की समय सीमा में चार्जशीट पेश नहीं हो रहा है। जबकि मुख्यालय ने पूर्व में स्पष्ट निर्देश जारी किया हुआ है, जिसके अनुसार पुलिस टीम पर हमले के मामले में अज्ञात के विरुद्ध एफआईआर दर्ज नहीं करना है। हालांकि, जिले में इसका पालन नहीं हो रहा है। साथ ही पुलिस पर हमले के मामलों में थानावार सूची तैयार कर उनके विरुद्ध कार्रवाई कर 15 दिनों में चार्जशीट दाखिल करने का निर्देश है। इन नियमों का भी जिले में पालन नहीं हो रहा है।
जिले में सामुदायिक पुलिसिंग कमजोर, नतीजा 40 से अधिक घटनाओं में 60 के करीब पुलिस कर्मी घायल
अपराधी तो अपराधी अब आम लोगों के गुस्से की भी शिकार हो रही है पुलिस। इस वर्ष पुलिस पर हमले की 40 से अधिक हमले की घटनाएं हुई हैं। इसमें अब तक 60 के करीब पुलिस कर्मी घायल हो चुके हैं। कुछ मामलों को छोड़ दें तो अधिकांश मामलों में पुलिस का रवैया आम लोगों के प्रति फ्रेंडली नहीं रहा है। पुलिस कार्रवाई को लेकर आक्रोशित आम लोगों को समझा पाने में विफल हो रही है। वह रौब के सहारे मामले के निष्पादन में यकीन रखती है और यही कारण है कि पुलिस टीम पर आए दिन हमले के मामले सामने आ रहे हैं। इन हमलों के मामले भी पुलिस का रवैया मुख्यालय के निर्देश के विपरीत होता है। बता दें कि जिले के मुसरीघरारी थाना क्षेत्र के मोरवा रायटोला में बीते 17 नवंबर की रात एक वारंटी को पकड़ने गई पुलिस टीम पर ग्रामीणों ने हमला बोल दिया था। इस हमले में एक पुलिस अधिकारी समेत आधा दर्जन पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। इसमें एसआई यदुवंश सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिनका इलाज कराया जा रहा है।
पुलिस टीम पर फायरिंग, थानाध्यक्ष को लहूलुहान कर हाथ तोड़ने तक की घटना हो चुकी है जिले में
मोरवा रायटोला की घटना कोई एक पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी पुलिस के ऊपर हमले की कई घटनाएं हो चुकी है। बता दें कि इसी वर्ष जुलाई महीने में छापेमारी करने गई विभूतिपुर पुलिस टीम पर आक्रोशित लोगों ने हमला कर दिया और थानाध्यक्ष का हाथ तोड़ दिया। वहीं, इसी वर्ष वारिसनगर थानाध्यक्ष सहित अन्य पुलिस कर्मियों पर जानलेवा हमला हो चुका है। रोसड़ा थाना क्षेत्र के बैजनाथपुर गांव में छापेमारी करने पहुंची डीआईयू की टीम पर बैंक लूट की साजिश रच रहे अपराधियों ने फायरिंग कर दी थी। हालांकि, पुलिस ने खदेड़कर एक अपराधी को गिरफ्तार कर लिया था। वहीं अन्य बदमाश वहां से फरार हो गए। गिरफ्तार अपराधी के पास से एक अग्नेयास्त्र और मादक पदार्थ बरामद हुआ था। वहीं, फायरिंग की दूसरी घटना सोमनाहा गांव में गुप्त सूचना पर छापेमारी करनी पहुंची डीआईयू की टीम के ऊपर 20 अगस्त की देर शाम अपराधियों ने तीन राउंड फायरिंग कर दी थी। पुलिस को भी जवाबी फायरिंग करनी पड़ी। इसमें पुलिस ने एक अपराधी को गिरफ्तार किया था। उसके पास से एक पिस्टल सात गोली दो मैगजीन बरामद हुआ था।
जिले में नहीं मिल रहा सामुदायिक पुलिसिंग को बढ़ावा
बिहार पुलिस मुख्यालय के द्वारा स्पष्ट निर्देश है कि इन घटनाओं में तस्वीर और वीडियो फुटेज के आधार पर हमलावरों की पहचान कर उनके विरुद्ध नामजद केस दर्ज करना है, लेकिन अज्ञात के विरुद्ध केस नहीं दर्ज करना है। निर्देश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि ऐसे केस को स्वीकार ही नहीं किया जाएगा। इस मामले में अब हमलावरों को लीड करने वालों या उसमें संलिप्त मुख्य लोगों के नाम केस में शामिल होंगे। इसको लेकर सभी रेंज आईजी और डीआईजी को पूर्व में निर्देश दिए जा चुके हैं। हालांकि, जिले में इसका अनुपालन नहीं हो रहा है। इतना ही नहीं पुलिस पर हमला करने वाले असामाजिक तत्वों से अब सख्ती से निपटने के लिए इन घटनाओं में शामिल लोगों की थानास्तर पर सूची बनाकर गिरफ्तारी सुनिश्चित कराने एवं इन मामलों में 15 दिनों में चार्जशीट पेश करने का का निर्देश डीजीपी विनय कुमार दे चुके हैं, लेकिन इसका भी अनुपालन सही से नहीं हो रहा है। इन घटनाओं के पीछे अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई, पुलिस और आम लोगों के बीच संवाद की कमी और आपसी अविश्वास इसके प्रमुख कारण हैं। पुलिस टीम पर घटनाओं को रोकने के लिए जिले में सामुदायिक पुलिसिंग को बढ़ावा नहीं दिया जा रहा है।
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सामुदायिक पुलिसिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। थाना स्तर पर विशेष बैठकें आयोजित कर संवाद स्थापित किया जाएगा। साथ ही ऐसे मामलों में पहचान कर उनके विरुद्ध मामला दर्ज किया जाता है। ऐसी घटनाओं में संलिप्त आरोपियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जा रही है और आगे भी उनसे सख्ती के साथ निपटा जाएगा।
अरविंद प्रताप सिंह, एसपी, समस्तीपुर

