गोवर्धन पूजा पर भमरुपुर में गोमाता की श्रद्धाभाव से पूजा, गौसेवा कर मांगी सुख-समृद्धि की कामना
Samastipur : कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा बुधवार को गोवर्धन पूजा जिले भर में परंपरागत श्रद्धाभाव और धूमधाम से मनाया गया। गायों को नहलाया गया, उन्हें वस्त्र पहना तिलक लगाए गए। श्रद्धालुओं ने गोमाता की पूजा अर्चना की और गोवंश को हरा चारा खिलाकर अपने सुख समृद्धी की कामना की। नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से गो माता की पूजा अर्चना की। शहर के भमरूपुर में ब्राह्मण महासंघ के जिलाध्यक्ष जितेन्द्र चौधरी ने गायों को नहलाकर, उन्हें हरा चारा खिलाया और आरती उतारी। उन्होंने बताया कि गौ माता भारतीय सनातन संस्कृति की मूल है। वेद शास्त्रों में गाय को मा का सम्मान प्राप्त है। हिंदू धर्म और संस्कृति की आत्मा है।
गाय आध्यात्मिक उर्जा का देवालय भी है। गाय में 33 करोड़ देवी देवताओं का वास है। गो माता के पूजन के समस्त देवताओं का स्वत: पूजन हो जाता है। इसके अलावे गोवंश का सामाजिक आर्थिक महत्व है। शास्त्र, वेदों और पुराणों में इसके महत्व की चर्चा की गई है। मानव जीवन के प्रारंभ काल से लेकर अंतिम समय तक के सभी सोलह संस्कारों में धार्मिक व्यवस्थाओं व सामाजिक विषयों के केंद्र में गो माता को प्रतिष्ठित किया और गोवंश एवं पंच गव्य को आर्थिक आधार स्तंभ बनाए रखा। इसी के फलस्वरुप कृषि, उद्योग, रोजगार व स्वास्थ्य और सामाजिक समरसता सहित समस्त प्रकृति के संतुलन में युगों तक कामयाब रहे हैं।
गाय का गोबर, मूत्र आदि सभी प्रकार के विकिरण को दूर करता है और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। जब तक गो सेवा व्यवस्था लागू नहीं होती है, तब तक मुनष्य का भाग्य नहीं बदल सकता और न ही वैदिक भूमि में परिवेश मिल सकता है।

