गिरफ्तारी के दो महीने बाद अंजनी छूटा और फिर से चलाने लगा साइबर फ्रॉड गिरोह
ईओयू की कार्रवाई के दौरान फरार हुआ, चाय पत्ती बागान का है मालिक
गिरोह से जुड़े एक बांग्लादेशी नागरिक को पश्चिम बंगाल एसटीएफ ने कोलकाता एयरपोर्ट से किया था गिरफ्ता
Samastipur : आर्थिक अपराध इकाई की कार्रवाई के बाद जिले में सिम बॉक्स के जरिए साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क मामले का खुलासा हुआ है। जांच में इस नेटवर्क के तार कई राज्यों और विदेशों तक फैले होने की बात सामने आयी है। गहन तफ्तीश के लिए सीबीआई और आईबी की विशेष टीमें भी जल्द जांच में शामिल हो सकती हैं। ईओयू की टीम की रोसड़ा में कार्रवाई के दौरान भागने में सफल रहे गिरोह के मास्टरमाइंड रोसड़ा थाना क्षेत्र के ढटट्टा के रामनारायण महतो का पुत्र अंजनी कुमार स्वतंत्र के संबंध में नई जानकारी सामने आयी है। मिली जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल एसटीएफ ने बीते एक अगस्त को जिले के रोसड़ा थाना क्षेत्र के ढट्टा गांव के रहने वाले रामनाथ महतो के पुत्र अंजनी कुमार स्वंत्रत ऊर्फ नेताजी को गिरफ्तार किया था। एसटीएफ गिरफ्तार आरोपित को कोर्ट से ट्रांजिट रिमांड पर लेकर सिलीगुड़ी ले गई थी। इस मामले में पहले एसटीएफ ने कोलकाता हवाई अड्डा से तीन लोगाें को गिरफ्तार भी किया था। इसमें एक बांग्लादेश का रहने वाला युवक भी शामिल था। पुलिस पूछताछ में गिरोह के मास्टरमाइंड समस्तीपुर के अंजनी कुमार स्वंतत्र का नाम सामने आया था। हालांकि, करीब दो महीने में ही वह पुलिस के चंगुल से आजाद हो गया और फिर से गिरोह का संचालन करने लगा। इस बार उसने वाराणसी में सेटअप कर रखा था। वह पिछले कई साल से दार्जलिंग में चायपत्ती का व्यापार करता था। उसने दार्जलिंग में चाय पत्ती का बागान ले रखा था और वहां उसका अपना मकान भी है। अंजनी दार्जलिंग में अपने मकान को किराए पर लगा रखा था। पुलिस सूत्रों के अनुसार दार्जलिंग में अंजनी के किराये के मकान से अवैध सिम बॉक्स और कई इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स बरामद किया था।
ठगी की रकम को क्रिप्टोकरेंसी में तब्दील कर क्रिप्टो वॉलेट्स के जरिए लेन-देन करने की संभावना
ईओयू ने बीते 23 सितंबर को रोसड़ा थाना क्षेत्र के ढटट्टा के शिवगुलाम सिंह के पुत्र चंद्रबली सिंह, हसनपुर थाना क्षेत्र के दुधपुरा के अरुण कुमार के पुत्र पीओएस संचालक मुन्ना कुमार को गिरफ्तार किया था। उनके पास व निशानदेही पर वाराणसी से एक सिम बॉक्स, 16 एंटिना, राउटर और 13 बीएसएनएल सिम बरामद किए गए, जबकि बायसी पूर्णिया में भी एक सिम बॉक्स और अन्य तकनीकी उपकरण जब्त किए गए थे। साइबर बदमाशों के नेटवर्क में रोसड़ा का बीएसएनएल सिम वितरक सज्जाद भी शामिल है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस तरह का गिरोह ठगी की रकम को क्रिप्टोकरेंसी में तब्दील कर क्रिप्टो वॉलेट्स के जरिए लेन-देन करता है। इनके पास अलग-अलग नामों से खोले गए बैंक खाते होते हैं। जिसमें ये बदमाश ठगी के करोड़ों रुपए जमा कर रखे होते हैं। पूर्व में ईओयू ने इस तरह के कई बैंक खातों को सील किया है। इस मामले में भी टीम इसकी जांच कर कार्रवाई की तैयारी में है। मिली जानकारी के अनुसार, फिलहाल दूरसंचार विभाग क्षति का आकलन कर रहा है।
एटीएम क्लोनिंग से डिजिटल अरेस्ट तक, साइबर गैंग फर्जी स्कीम, लोन और लकी ड्रॉ का झांसा देकर खाली करते हैं खाते
साइबर ठगी के इस बड़े रैकेट ने सिम बॉक्स और फर्जी सिम कार्ड सप्लाई की मदद से पूरे तंत्र को ऑपरेट किया। जांच में सामने आया है कि ये लोग कॉमन सर्विस सेंटर की आड़ में ग्रामीणों का बायोमीट्रिक डेटा इकट्ठा कर ठगी के लिए सिम कार्ड जारी कराते थे। एटीएम कार्ड क्लोनिंग, डिजिटल अरेस्ट, लॉटरी और गेम्स जैसे झांसे देकर लोगों को फंसाना इनकी प्रमुख रणनीति रही है। कभी केवाईसी अपडेट के नाम पर सरकारी अधिकारी बनकर कॉल करते थे तो कभी कम डॉक्यूमेंट पर पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड दिलाने का लालच देते थे। अधिक रिटर्न वाली फर्जी स्कीमें और लकी ड्रॉ का चारा डालकर आम लोगों से मोटी रकम वसूलते थे। ठगे गए पैसे को पहले फर्जी अकाउंट में और फिर कई चरणों में ट्रांसफर कर विदेशी खातों तक पहुंचा दिया जाता था। ईओयू ने अब अवैध सिम आपूर्तिकर्ताओं के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए टेलीकॉम कंपनियों और विभाग से सीधा सहयोग मांगा है।

