क्राइम

विद्युत अधीक्षण अभियंता की 30 करोड़ की अवैध संपत्ति, समस्तीपुर शॉपिंग मॉल में लगा है पैसा

ईओयू की जांच में पति-पत्नी के नाम पर 21 प्लॉट-फ्लैट, बैंक लॉकर से 30 लाख का सोना बरामद

फर्जी कंपनियों के जरिए रियल एस्टेट और कारोबार में निवेश, पीएमएलए के तहत कार्रवाई की तैयारी

Samastipur : समस्तीपुर जिले के विद्युत अधीक्षण अभियंता विवेकानंद के ठिकानों पर चल रही आर्थिक अपराध इकाई की जांच गुरुवार को पूरी हो गई। जांच में अब तक इंजीनियर के पास करीब 30 करोड़ रुपए की संपत्ति मिली है। वहीं, उत्तरप्रदेश के गोरखपुर एवं वाराणसी में ईओयू को इनके द्वारा भू-खण्ड क्रय किये जाने की सूचना भी मिली है। वहीं, समस्तीपुर जिले के एक शॉपिंग मॉल में भी निवेश की सूचना है। ईओयू इस संबंध में अनुसंधान कर रही है। विवेकानंद के नाम से सिवान जिले में अलग-अलग जगहों पर चार प्लॉट एवं उनकी पत्नी बॉबी के नाम से सिवान और पटना जिले में अलग-अलग 17 प्लॉट व फ्लैट मिला है। छापेमारी की कार्रवाई में ईओयू को विवेकानंद ने अपनी पत्नी के नाम पर एक दस्तावेज के माध्यम से लगभग साढ़े तीन बिगहा भू-खण्ड सिवान में एक साथ खरीदने का पता चला है। साथ ही बहुत सारी ऐसे परिसम्पतियां भी पायी गई है, जिनकी उद्घोषणा विद्युत अधीक्षण अभियंता विवेकानंद के द्वारा अपने सम्पति विवरणी में नहीं की गई है। सिवान स्थित भारतीय स्टेट बैंक में श्री विवेकानंद के पत्नी बॉबी के नाम पर एक लॉकर से करीब 30 लाख रुपए मूल्य का स्वर्ण आभूषणों मिला है। अवैध रूप से अर्जित सम्पति को वैध बनाने के लिए मेसर्स आद्या इंटर प्राइजेज एवं मेसर्स ग्रेस इन्फ्रास्ट्रक्चर एण्ड डेवेलपर्स के नाम से दो फर्जी कंपनी खोल रखा था। इस कंपनी का खाता एचडीएफसी बैंक में खोला गया था और उसमें उनकी पत्नी बॉबी का पैन कार्ड जुड़ा हुआ है। कंपनी का दिया गया पता फर्जी है। इसके माध्यम से विवेकानंद रियल स्टेट व्यवसाय एवं अन्य वाणिज्यिक गतिविधियों में संलिप्त होने की संभावना है।

ईओयू ने बीते बुधवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए नार्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड समस्तीपुर के विद्युत अधीक्षण अभियंता विवेकानंद के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी। बिहार पुलिस मुख्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, अभियंता विवेकानंद ने अपनी वैध आय से लगभग 77.84 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित की है। जांच में यह बात सामने आई है कि उनकी वैध आय दो करोड़ 74 लाख रुपए है, जबकि अर्जित संपत्ति का मूल्य चार करोड़ 87 लाख 30 हजार 345 रुपए आंका गया है। कोर्ट से तलाशी अधिपत्र प्राप्त करने के बाद ईओयू की दस सदस्यीय टीम ने एक साथ छापेमारी की थी। यह कार्रवाई सिवान जिले के रघुनाथपुर थाना क्षेत्र स्थित पैतृक आवास, नगर थाना क्षेत्र के लक्ष्मीपुर स्थित निवास ‘कुंटी कुटीर’, हुसैनगंज थाना क्षेत्र के रसीदचक स्थित मकान, पटना जिले के रूपसपुर थाना क्षेत्र स्थित काश्यप ग्रीन सिटी के फ्लैट नंबर 601 ब्लॉक-ई, समस्तीपुर जिले के मुसरीघरारी थाना क्षेत्र के वास्तु विहार स्थित आवास तथा समस्तीपुर शहर के चीनी मिल चौक स्थित एनबीपीडीसीएल भवन स्थित उनके कार्यालय पर की गई थी। छापेमारी के दौरान टीम ने कई महत्वपूर्ण फाइलों और दस्तावेजों को जब्त किया था।

विद्युत अधीक्षण अभियंता विवेकानंद वर्ष 2009 में सहायक विद्युत अभियंता के पद पर 13 मार्च 2009 को योगदान दिये थे। सरकारी सेवा के क्रम में वे सहरसा, दलसिंहसराय, हाजीपुर, मोतिहारी, पूर्णिया, छपरा, रोहतास पटना एवं समस्तीपुर आदि जगहों पर एनबीपीडीसीएल व एसबीपीडीसीएल कार्यालयों में पदस्थापित रहे हैं। अभी तक के जांच के सत्यापन एवं अनुसंधान में पाये गये तथ्यों से ईओयू को विवेकानंद द्वारा स्वयं तथा अपने सहयोगियों के माध्यम से करीब 30 करोड़ रुपए मूल्य की परिसम्पतियां अर्जित करने का पता चला है। ईओयू को मुरली सिंह के पुत्र ललन सिंह एवं विसर्जन सिंह के एचडीएफसी बैंक खाता भी मिला है। इसमें विवेकानंद का मोचाईल नंबर एवं ईमेल आईडी जुड़ा हुआ है। इस बैंक खाते में विवेकानंद के पदस्थापन स्थल से बड़ी मात्रा में नगद व यूपीआई के माध्यम से भारी राशियों जमा करायी गई है। जिसके संबंध में ईओयू अनुसंधान कर रही है। ईओयू को विवेकानंद के द्वारा पैसों के मनी लॉन्ड्रिंग के प्रथम दृष्टया साक्ष्य मिलें हैं। इस संबंध में विशिष्ट एजेंसियों की मदद से पीएमएलए-2002 के अन्तर्गत कार्रवाई की जाएगी। इनके विरुद्ध विभागीय स्तर से कार्रवाई हेतु संबंधित विभाग को पत्राचार किया गया है।

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