क्राइम

अब हथियार के साथ पकड़े गए अभियुक्तों पर चलेगा स्पीडी ट्रायल, इस वर्ष 155 गिरफ्तार व 16 को सजा

जिले में भी बनेगी विशेष कोर्ट, अवैध हथियार मामलों की होगी त्वरित सुनवाई

आर्म्स एक्ट के मामले में आईओ को तय समय सीमा के भीतर अनुसंधान पूरा कर चार्जशीट दाखिल करने का निर्देश

जिले में अवैध हथियारों पर नकेल कसने के लिए पुलिस ने मोर्चा खोल दिया है। पुलिस के अनुसार, इस साल अब तक 155 लोग आर्म्स एक्ट के तहत हथियारों के साथ गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जिनमें बदमाश, तस्कर और खरीद-फरोख्त करने वाले शामिल हैं। वहीं, इस वर्ष आर्म्स एक्ट के 16 आरोपितों को स्पीडी ट्रायल के जरिए सजा भी दिलाई जा चुकी है। एसपी अरविंद प्रताप सिंह के अनुसार, सभी थानेदारों और आईओ को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि तय समय सीमा के भीतर अनुसंधान पूरा कर चार्जशीट दाखिल करें, ताकि दोषियों को कोर्ट से जल्द सजा दिलाई जा सके। जिन मामलों में पुलिसकर्मियों की गवाही अधूरी है, उन्हें खोजकर अदालत में पेश किया जाएगा। पुलिस मुख्यालय ने साफ कर दिया है कि आर्म्स के साथ गिरफ्तारी के मामले में स्पीडी ट्रायल कराया जाएगा, ताकि अपराधियों को जल्द कानून के शिकंजे में कसा जा सके और पुलिस की कार्रवाई का असर जमीन पर दिखे।

जिले में गठित होगी विशेष अदालत

आर्म्स एक्ट के मामलों में तेजी लाने के लिए राज्य सरकार अब हर जिले में विशेष कोर्ट बनाने की तैयारी में है। पुलिस मुख्यालय ने इसका प्रस्ताव भेजते हुए कहा है कि लंबे समय से मुकदमों के लटकने का फायदा अपराधी उठाते रहे हैं और निडर होकर अवैध हथियार का प्रदर्शन करते हैं। 2005 से 2011 तक जब फास्ट ट्रैक कोर्ट सक्रिय था, तब अपराधियों को हफ्तेभर में ही सजा मिलने लगी थी और नतीजतन हथियार लहराने की घटनाओं पर लगाम लग गई थी। लेकिन फास्ट ट्रैक कोर्ट खत्म होते ही मामलों की सुनवाई सुस्त पड़ गई। अब प्रस्तावित विशेष अदालतों के गठन से समस्तीपुर समेत पूरे राज्य में मुकदमों का समय पर निपटारा होगा। इससे जहां पुलिस का मनोबल ऊंचा होगा, वहीं अपराधियों के हौसले पस्त होंगे और कानून का खौफ एक बार फिर लौटेगा।

कानून के डर से थमेगा अवैध हथियारों का प्रसार

पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि आर्म्स एक्ट के मामलों में दोष सिद्ध करना अपेक्षाकृत आसान होता है, क्योंकि इनमें पुलिस अधिकारियों और कर्मियों की गवाही ही काफी मानी जाती है। इसके बावजूद मामलों की सुनवाई लंबित रहने से अपराधियों को राहत मिलती रही है। आर्म्स एक्ट, 1959 के तहत बिना लाइसेंस हथियार रखने पर तीन से सात साल तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है, जबकि प्रतिबंधित हथियारों का इस्तेमाल करने पर उम्रकैद तक की सजा और भारी जुर्माना हो सकता है। सजा की गंभीरता इस पर निर्भर करती है कि हथियार किस प्रकार का था और उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से हुआ। राज्य सरकार को उम्मीद है कि विशेष अदालतों की स्थापना से न केवल मुकदमों की सुनवाई तेज होगी बल्कि अपराधियों के मन में कानून का डर भी गहराएगा। जिले में भी इस पहल से अपराध नियंत्रण को नई दिशा मिलेगी।

एके-47 व हथियार के जखीरे के साथ निलंबित एएसआई हुआ था गिरफ्तार

मोहिउद्दीननगर थाना क्षेत्र के सुल्तानपुर गंगा दियारा में छह जून को बिहार एसटीएफ और समस्तीपुर पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए निलंबित एएसआई सरोज सिंह को गिरफ्तार किया। पुलिस ने उसके ठिकाने से एके-47 के अलावा कई राइफलें, बंदूक, मैगजीन और कई कारतूस बरामद किया था।

 

दिल्ली का युवक पिस्तौल के साथ हुआ था गिरफ्तार

पटोरी पुलिस ने 14 अगस्त की शाम पुरानी बाजार राम जानकी ठाकुरबाड़ी के समीप वाहन चेकिंग के दौरान दिल्ली के एक युवक को पिस्तौल, बाइक एवं खाली मैगजीन के साथ गिरफ्तार किया था। वह बाइक पर सवार था और पुलिस को देखते ही भागने लगा। जिसे खदेड़ कर पकड़ा गया।

पटना का हथियार तस्कर चार पिस्तौल, 8 मैगजीन व 62 गोली के साथ हुआ था गिरफ्तार

मुसरीघरारी पुलिस ने तीन मार्च को वाहन चेकिंग के दौरान पटना जिले के हथियार तस्कर मोकामा थाना क्षेत्र के शिवनार वार्ड छह के निर्धन पासवान के पुत्र पप्पू कुमार ऊर्फ प्रेम बाबू को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने उसके पास से चार पिस्टल, आठ मैगजीन, 62 गोली, एक टेम्पू व एक मोबाइल बरामद किया था।

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