एफआईआर दर्ज करवाने के लिए पीड़ितों राष्ट्रीय मानवधिकार आयोग तक लगानी पड़ती है गुहार
साइबर थाना में लचर कार्रवाई : पीड़ितों को नहीं मिल रहा न्याय, डीएसपी का पद रिक्त
समस्तीपुर : साइबर फ्रॉड के मामले में पीड़ितों को एफआईआर दर्ज कराने के लिए महीनों साइबर थाने का चक्कर लगाने को मजबूर होना पड़ता है। उसके बाद भी पुलिस मामला दर्ज करने में आनाकानी करती है। यहां तक कि डिजिटल अरेस्टिंग जैसे गंभीर मामले में भी पुलिस पीड़ितों को 10 महीने थाना का चक्कर लगवाती है। इसके बावजूद भी उनका एफआईआर दर्ज नहीं करती है। जब तक कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से केस दर्ज करने का निर्देश नहीं मिलता है। ऐसे एक नहीं कई मामले हैं, जिसमें पुलिस ने महीनों बाद एफआईआर दर्ज किया है। वहीं, दर्ज मामलों के निराकरण में भी पुलिस का रिकॉर्ड अच्छा नहीं है। साइबर थाने में डीएसपी रैंक के पदाधिकारी को एसएचओ का प्रभार दिया गया है। बावजूद इसके साइबर थाना की यह हालत है। जब एफआईआर दर्ज करने में पुलिस 10 महीने का समय लेती है, तो मामलों में कार्रवाई कब तक होगी, यह इससे समझा जा सकता है। बता दें पिछले साल साइबर थाना में 73 मामले दर्ज किए गए थे। वहीं, इस वर्ष अब तक 13 मामले रजिस्टर्ड हुए हैं।
-: जॉब और इन्वेस्टमेंट के नाम पर ठगी :-
साइबर ठग लोगों को अनजान नंबरों से कॉल और मैसेज भेजकर लोगों को जाल में फंसाते हैं। ठगी के नए तरीकों में संदिग्ध लिंक पर क्लिक कराकर बदमाश बैंकिंग डिटेल चुरा लेते हैं। वहीं बैंक केवाईसी और क्रेडिट कार्ड अपडेट के नाम पर फर्जीवाड़ा करते हैं। वहीं नकली कस्टमर केयर बनकर ओटीपी पूछ लेते हैं और झूठे इनाम या कैशबैक का लालच देकर लोगों के साथ साइबर फ्रॉड की घटना करते हैं। इसके अलावा ऑनलाइन जॉब की तलाश करने वालों को साइबर ठग सबसे ज्यादा निशाना बनाते हैं। साइबर बदमाश जॉब वेबसाइट और सोशल मीडिया के जरिए फर्जी नौकरी के ऑफर देते हैं। वहीं ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म पर सिक्योरिटी डिपॉजिट के नाम पर पैसों की मांग की जाती है और हाई रिटर्न का झांसे में आए लोग ठगी का शिकार हो जाते हैं। इससे जुड़े कई मामले आ चुके हैं।
केस एक
10 महीने व मानवाधिकार आयोग से शिकायत करने पर हुआ डिजिटल अरेस्टिंग के मामले एफआईआर
मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के आजादनगर मोहल्ले में रहने वाले रामाशीष महतो की पत्नी स्वीटी कुमारी को साइबर बदमाशों ने फोन कर प्रयागराज में पढ़ाई करने वाले उनके पुत्र के रेप मामले पुलिस के द्वारा गिरफ्तार किए जाने का झांसा देकर उनसे 20 हजार रुपए की ठगी कर ली। 10 महीने साइबर थाना का चक्कर लगाने व मानवाधिकार आयोग से शिकायत करने के बाद पुलिस ने उनका मामला दर्ज किया। रामाशीष महतो के अनुसार इस मामले में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
केस दो
साइबर फ्रॉड के मामले शिकायत के 10 महीने बाद हुआ एफआईआर
पटोरी थाना क्षेत्र के हवासपुर के मो. आरिफ के पुत्र मो. नूर आलम के साथ पिछले वर्ष 16 जनवरी को साइबर बदमाशों ने बैंक में आधार केवाईसी के नाम पर फोन किया था। उसके बाद 21 जनवरी 2024 को उनके बैंक खाते से 56 हजार रुपए का साइबर फ्रॉड हो गया। शिकायत करने के बाद भी पुलिस ने इस घटना की एफआईआर 10 महीने बाद जाकर की। वहीं, उन्होंने बताया कि अब तक फ्रॉड हुआ राशि उनके बैंक खाते में वापस नहीं आया है और न ही कोई कार्रवाई हुई है।
केस तीन
40 रोज चक्कर लगाने के बाद दर्ज किया एफआईआर
हलई (ताजपुर) थाना के रड़ियाही कुमैया के नरसिंह राय के पुत्र रामप्रवेश राय के साथ 13 नवंबर को साइबर बदमाशों ने आधार एक्टीवेट के नाम पर फोन कर दो लाख 50 हजार रुपए का साइबर फ्रॉड कर लिया। इसकी जब उन्होंने साइबर थाने में शिकायत की तो लगभग 40 दिन चक्कर लगाने के बाद चार जनवरी को पुलिस ने उनका मामला दर्ज किया। रामप्रवेश राय के अनुसार उनकी फ्रॉड हुई राशि उन्हें वापस नहीं मिली है और पुलिस ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है।
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दर्ज मामलों में कार्रवाई होती है और कई पीड़ितों का पैसा होल्ड होता और रिटर्न भी होता है। मुख्यालय स्तर से रेगुलर इसकी मॉनिटरिंग होती है।
आशीष राज, प्रभारी एसएचओ, साइबर थाना, समस्तीपुर